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21, Sep 2025
माता श्राइकोटी मंदिर: जहां पति पत्नी नहीं कर सकते साथ में दर्शन / मिलती हैं सजा / ऐसा कौन सा श्राप है जिसके कारण नहीं कर सकते साथ में पूजा अर्चना/ आइए जानते हैं !!!

देशभर में मां दुर्गा की अलग-अलग अवतारों में पूजा की जाती है। मां दुर्गा के कई मंदिर हैं, जहां कई हजारों में भक्त अपनी इच्छाओं को लेकर आते हैं। दुर्गा माता का एक ऐसा ही मंदिर हिमाचल प्रदेश में मौजूद है, जहां दर्शन करने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है। लेकिन ये मंदिर ऐसा वैसा आम मंदिर नहीं है, इसकी एक बड़ी खासियत है, जिसके बारे में जानकार आप शायद चौक जाएंगे। मंदिर में आपको पति-पत्नी एक साथ पूजा करते हुए दिखाई नहीं देंगे। जी हां, हिमाचल का ‘श्राई कोटि’ मंदिर एक ऐसा मंदिर है, जहां जोड़े एक साथ मां के दर्शन नहीं कर सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि अगर उन्होंने ऐसा किया, तो उनमें जल्द ही तलाक हो जाता है। चलिए आपको इस मंदिर के बारे में कुछ दिलचस्प बातें बताते हैं।

पौराणिक मान्यता के अनुसार क्यों नहीं यहां पूजा –

मंदिर में पति-पत्नी के एक साथ पूजा न करने के पीछे प्रचलित कहानी है। माना जाता है कि भगवान शिव अपने दोनों पुत्रों को गणेश और कार्तिकेय को ब्रह्मांड का चक्कर लगाने के लिए कहा था। कार्तिकेय तो अपने वाहन पर बैठकर चक्कर लगाने के लिए चले गए लेकिन गणेश ने माता-पिता के चारों ओर चक्कर लगाना शुरू कर दिया और इस तरह उन्होंने खुद को विजेता घोषित कर दिया। उनके ऐसा करने पर उन्होंने जवाब दिया कि उनके माता-पिता के चरणों में ही ब्रह्मांड है, जिस वजह से उन्होंने इनकी परिक्रमा की।

कार्तिकेय ने लिया था कभी न शादी करने का फैसला –

जब कार्तिकेय ब्रह्मांड का चक्कर लगाकर आए तब तक गणेश की शादी हो चुकी थी। ये देखने के बाद वो गुस्से में भर गए और उन्होंने कभी शादी न करने का संकल्प ले लिया। उनके विवाह न करने से माता पार्वती बेहद नराज हुई। उन्होंने कहा जो भी पति-पत्नी उनके दर्शन करने के लिए एक साथ आएंगे, वो बाद में कभी खुश नहीं रह पाएंगे। जिस वजह से आज भी यहां व्यक्ति पति-पत्नी एक साथ पूजा नहीं करते।

यहां जाने वाले जोड़े अलग-अलग जाकर मूर्ती के दर्शन करते हैं। मान्यता ये है कि अगर कोई गलती से कपल एक साथ अंदर चला ही जाता है, तो उन्हें इस बात की सजा दी जाती है। वैसे इस बात में कितनी सच्चाई है, इसके बारे में कहना थोड़ा मुश्किल है। आप इस मंदिर को देखकर आस्था भी कह सकते हैं और अंधविश्वास का भी नाम दे सकते हैं।

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