
शरद पूर्णिमा हिंदू धर्म का एक अत्यंत पावन और विशेष पर्व है। यह दिन आश्विन माह की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इसे कोजागरी पूर्णिमा या रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। शास्त्रों में मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन की गोपियों के साथ महानंदमयी महारास किया था। इस बार इसे 6 अक्टूबर को मनाया जाएगा!
🪔 शरद पूर्णिमा का महत्व

इस दिन चंद्रमा की किरणों में विशेष अमृत तत्व होता है।ऐसा माना जाता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा सोलह कलाओं से पूर्ण होकर अपनी चांदनी से धरती पर अमृत वर्षा करता है।आयुर्वेद के अनुसार, इस रात को चांदनी में रखा दूध पीने से शरीर को रोगों से मुक्ति मिलती है और यह बेहद पौष्टिक होता है।यह दिन मां लक्ष्मी की पूजा और उनके आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उत्तम माना जाता है।
🙏 शरद पूर्णिमा की पूजा विधि

1. प्रातः स्नान करके घर में शुद्ध वातावरण बनाएं।
2. मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करें।
3. व्रत रखने वाले पूरे दिन फलाहार करते हैं।
4. रात को दूध में चावल डालकर खीर बनाई जाती है।
5. इस खीर को चांदनी रात में खुले आकाश के नीचे रखा जाता है और अगली सुबह प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।
🌸 शरद पूर्णिमा व्रत कथा

एक पौराणिक कथा के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात जो व्यक्ति जागरण करता है, मां लक्ष्मी स्वयं उसके घर आती हैं और आशीर्वाद देकर दरिद्रता दूर करती हैं। इसी कारण इसे कोजागरी पूर्णिमा कहा जाता है, जिसका अर्थ है – “कौन जाग रहा है?”
✅ शरद पूर्णिमा से जुड़े उपाय
इस दिन लक्ष्मी पूजन करने से घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है।चंद्रमा को अर्घ्य देकर मनोकामना पूरी की जा सकती है।जरूरतमंदों को भोजन व वस्त्र दान करने से पुण्य मिलता है।
📌 निष्कर्ष
शरद पूर्णिमा 2025 का पर्व भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। यह दिन स्वास्थ्य, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक है। चांदनी रात में खीर का सेवन और मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है।👉 इस शरद पूर्णिमा पर व्रत रखें, दान करें और चंद्रमा की अमृतमयी चांदनी का लाभ उठाएं।































